स़िद्-दीक़ का पहला नंबर
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*🥀 स़िद्-दीक़ का पहला नंबर 🥀*
कूफ़ा के मिम्बर पर खड़े होकर मौला ह़ैदरे कर्रार (कर्रमल्लाहु तआ़ला वज्हहुल् करीम) ने तफ़्ज़ीलिय्यत की जड़ों को ही काट डाला, और एलान कर दिया:
"ألا، إن خير هذه الأمة بعد نبيها، أبو بكر، ثم عمر"،
" *ख़बरदार, नबी के बाद, इस उम्मत में सबसे अफ़्ज़ल, अबू बक्र हैं, फिर उ़मर हैं."*
*📚 मुस्नदे अह़मद, ह़दीस न. 833 से 837 तक, जिल्द न. 2, पेज न. 201, पब्लिकेशन: मुअस्ससतुर् रिसालह (बेरूत), पहला एडीशन, 1421 हि./2001 ई.*
*📚 तारीख़े दिमश्क़ (इब्ने अ़साकिर), ह़र्फ़ुल् ऐ़न, जिल्द न. 44, पेज न. 203, पब्लिकेशन: दारुल् फ़िक्र (बेरूत), 1415 हि./1995 ई.*
'स़ह़ीह़ बुख़ारी' में है कि ह़ैदरे कर्रार मौला अ़ली (कर्रमल्लाहु तआ़ला वज्हहुल् करीम) के बेटे हज़रत मुह़म्मद इब्ने ह़नफ़िय्यह (रद़ियल्लाहु अ़न्हु) रिवायत करते हैं:
"'قُلْتُ لِأَبِي أَيُّ النَّاسِ خَيْرٌ بَعْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ؟' قَالَ: 'أَبُو بَكْرٍ'، قُلْتُ: 'ثُمَّ مَنْ؟' قَالَ: 'ثُمَّ عُمَرُ'،
وَخَشِيتُ أَنْ يَقُولَ عُثْمَانُ، قُلْتُ: 'ثُمَّ أَنْتَ؟' قَالَ: 'مَا أَنَا إِلَّا رَجُلٌ مِنَ المُسْلِمِينَ'"،
*मैंने अपने वालिद (ह़ज़रत अ़ली) से पूछा कि आक़ाﷺ के बाद लोगों में सबसे अफ़्ज़ल कौन है तो ह़ज़रत अ़ली ने जवाब दिया अबू बक्र मैंने पूछा फिर कौन तो ह़ज़रत अ़ली ने जवाब दिया उ़मर फिर मुझे ख़ौफ़ हुआ कि अगर मैं अब पूछूँगा कि फिर कौन तो आप कहीं ह़ज़रत उ़स्मान का नाम न ले दें इसलिए मैंने डायरेक्ट पूछा फिर आप हैं न तो ह़ज़रत अ़ली ने (तवाज़ुअ़न्) जवाब दिया मैं तो सिर्फ़ मुसलमानों में से ही एक आदमी हूं'*
*📚 स़ह़ीह़ बुख़ारी, ह़दीस न. 3671, जिल्द न. 5, पेज न. 7, पब्लिकेशन: दारु त़ौक़िन् नजाह (बेरूत), फ़र्स्ट एडीशन 1422 हि.*
इमाम अबू बक्र बैहक़ी (d. 458 हि.), अपनी किताब: 'अल्-इअ़्तिक़ाद वल् हिदायह' में, और इमाम इब्ने अ़साकिर (d. 571 हि.) अपनी किताब: 'तारीख़े दिमश्क़' में रिवायत करते हैं कि मौला अ़ली (रद़ियल्लाहु अ़न्हु) ने बस़रा में मिंबर पर ख़ुत़बा देते हुए इर्शाद फ़रमाया:
"أَلَا، لَا يُفَضِّلْنِي أَحَدٌ عَلَى أَبِي بَكْرٍ وَعُمَرَ. لَا أُوتِیَ بِأَحَدٍ فَضَّلَنِي عَلَيْهِمَا إِلَّا جَلَدْتُهُ حَدَّ الْمُفْتَرِي"،
"ख़बरदार, कोई भी, अबू बक्र और उ़मर पर, मुझे फ़ज़ीलत नहीं देगा. मेरे पास जो भी शख़्स ऐसा लाया गया, जो मुझे इन दोनों से अफ़्ज़ल मानता है, उसे मैं 80 कोड़ों की सज़ा दूँगा."
*📚 अल्-इअ़्तिक़ाद वल् हिदायह, पेज नं. 358, पब्लिकेशन: दारुल् आफ़ाक़ (बेरूत), पहला एडीशन, 1401 हि.*
*📚 तारीख़े दिमश्क़ (इब्ने अ़साकिर), ह़र्फ़ुल् ऐ़न, ह़दीस नं. 3398, जिल्द न. 30, पेज न. 383, पब्लिकेशन: दारुल् फ़िक्र (बेरूत), 1415 हि./1995 ई.*
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