शान ऐ अबु बक्र सिद्दीक़ रदिअल्लाहो तआला अन्हो
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*🥀 शान ऐ अबु बक्र सिद्दीक़ रदिअल्लाहो तआला अन्हो 🥀*
*एक रात को खुले आसमान के नीचे हमारे प्यारे आक़ा सरकार ऐ दो आलम नूर ऐ मुजस्सम हज़रत मुहम्मद मुस्तफा मुहम्मद मुज़तबा सल्ललाहो तआला अलैहि वसल्लम हज़रते आइशा सिद्दीका रदिअल्लाहो तआला अन्हा के जानू ऐ अक़दस पर आराम फरमा रहे थे*
*तभी हज़रते आइशा रदिअल्लाहो तआला अन्हा ने सरकार से पूछा..*
*या रसूलअल्लाह क्या आसमान में जितने तारे है किसी के पास इतनी नेकियाँ है*
*हुज़ूर ने इरशाद फरमाया ऐ आइशा उमर इब्ने खत्ताब के पास इतनी नेकियाँ है*
*तो हज़रते आइशा सिद्दीक़ा रदिअल्लाहो तआला अन्हा ने फिर फ़रमाया*
*ओर मेरे बाप अबु बक्र सिद्दीक़ की नेकियाँ कितनी है*
*तो हुज़ूर ने इरशाद फ़रमाया ऐ आइशा सुनो*
*तुम्हारे बाप अबु बक्र की गार ऐ सोर में मेरे साथ बिताई एक रात उमर इब्ने खत्ताब की सारी नेकियों पर भारी है*
*सुब्हान अल्लाह*
*माशा अल्लाह*
*कल 22 जमादीउस्सानी 1441 हिजरी*
*यौमे विसाल खलीफ़ा ऐ अव्वल हज़रत अबू बक्र सिद्दीक रदिअल्लाहो तआला अन्हो*
*ख़ूब ख़ूब इसाले सवाब करें*
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*🏁मसलके आला हजरत 🔴*
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